दीदार
12 सित 2010 4s टिप्पणियाँ
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काश
खुदा एक पल के लिए
उनको भी द्रिष्टि बक्श दे
जो इस हुस्न के दीदार से महरूम है!
पता तू चले
ख़ुदा को भी कभी फुर्सत मिलती है
तब ही तू आपको बनाया है उसने!
ओ मेरे महबूब!
-प्रवीण





सित 25, 2010 @ 14:25:16
Very nice….gr8 [:)]
नव 21, 2011 @ 21:21:37
Thank you Shruti
नव 21, 2011 @ 12:15:20
kya khub likhte ho bada sundar likhte ho
नव 21, 2011 @ 21:22:27
Thank you dhochk