कश्मीर
01 नव 2009 4s टिप्पणियाँ
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स्वर्ग को चूम,
खुशीओं की हवायें बिखर गई,
अनजान अनदेखी दिशाओं में,
जब जब घाटी में जली बर्फ़,
सपनों को चूम,
जवानी की कलियाँ बिखर गई,
अनजान अनदेखी वादियों में,
जब जब घाटी में जली बर्फ़,
जीवन को चूम,
परिवारों की आश मिट गई
अज्ञात अनसुलझी इतिहास की गलतीओं में,
जब जब घाटी में जली बर्फ़,
क्या खोया, क्या पाया …?
भीगे हर नयन अपने थे !
जब जब घाटी में जली बर्फ़,
-प्रवीण





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